Monday, 9 July 2012

शालू ने जमकर चुदवाया - Hindi Stories Indian Sex Stories

मैं यानि संगीता, प्रिया और सोनिया पक्की सहेलियां हैं. हम तीनो की कोई बात आपस में किसी से छुपी नही रहती थी. हम तीनो में सबसे सुंदर मैं ही हूँ. पर प्रिया और सोनिया भी दिखने में सुंदर ही कहलाती हैं. प्रिया की शादी हुए २ साल हो चुके हैं. उसका एक बेबी बॉय भी है. प्रिया का पति एक तराशे हुए बदन का मालिक है. वो भी हमसे बहुत हिलमिल गया है. अक्सर ही हम लोग एक दूसरे के यहाँ पार्टी रखते हैं और साथ साथ हँसी मजाक करते हैं.

मेरी इच्छा भी अब होने लगी कि मैं भी दीपक के और करीब आऊँ. मुझे वो अच्छा भी लगता है.

मैंने अपनी और देखा. मेरा जिस्म भी सेक्सी है. मेरे स्तनों का उभार भी सुंदर है. गोलाई लिए सीधे ताने हुए, किसी को भी आकर्षित कर सकते हैं. मेरी कमर पतली है. मेरे चूतड थोड़े से भारी हैं. दोनों चूतडों की फांकें गोल और कसी हुयी हैं. चलते समय मेरी चूतडों की दोनों गोलाईयां ऊपर नीचे लहराती हैं. दीपक मुझे चोरी चोरी तिरछी निगाहों से देखते रहते थे. मैं उन के करीब रहने की कोशिश करने लगी. मैं प्रिया के यहाँ अधिक जाने लगी. अब दीपक भी मेरे से सेक्सी मजाक करने लगा था.

"हाय दीपक … प्रिया कहाँ है .."

"किचेन में है …अभी आ जायेगी बैठो .."

दीपक सफ़ेद पजामे और बनियान में था. मुझे देखते ही पता चल गया कि उसने अन्दर अंडरवियर नहीं पहना है. उसके सोये हुए लंड तक का आकार ऊपर से ही नजर आ रहा था.

मैंने जान बूझ के सोफे पर ऐसे झुक के बैठी कि उसे मेरे बूब्स आसानी से दिख जायें. उसने भी मेरे बूब्स को देखने का लालच नहीं छोड़ा. मैंने उसे देखते हुए पकड़ लिया. मैं मुस्कराई. वो शरमा गया …

"जीजा जी क्या देख रहे थे ….."

"कुछ नहीं …. बस .."

"शरारती हो ….है ना .."

दीपक का लण्ड अब धीरे धीरे खड़ा होने लगा था, मुझे देख कर वो उत्तेजित होने लगा था।

"कौन शरारत कर रहा है …" प्रिया कमरे में आते हुए बोली

"जीजा जी … मजाक अच्छी मजाक करते हैं .." मैंने बात बदल दी

" लो चाय हाजिर है …"

"प्रिया ….. जीजा जी से कहो ना कभी कभी तो हम पर भी लाइन मार लिया करें .."

"अरे तुम ही लाइन मार लो ना …..जीजा जी तो तुम्हारे ही है ना …"

"क्यों जीजा जी ……. क्या इरादा है …"

"दीपक …बताओ भी तो …"

"दीपक…बता भी दो …"

"अरे मौका तो मिलने दो ..... फिर इसका चुम्मा भी लूँगा …और ..और .."

"और क्या क्या करोगे …अब थोडी शर्म करो ...तुम्हारी बीवी पास खड़ी है ...."

"बीवी की पूरी परमिशन है ....... संगीता ये कह रहा है तो चुपके से दे ही देना .."

प्रिया मेरे पास आयी और मेरे कान में धीरे से कहा - "जरा ध्यान दो ...तुम्हारे जीजा जी का खड़ा हो रहा है .."

मेरी नजर तो पहले ही उसके लंड पर थी. ये सुनकर मैं शरमा गयी. मैं धीरे से बोली -

"धत् ......"

"क्या हुआ. .हमें भी तो बताओ ......."

उसकी बात सुनकर हम सभी हसने लगे. पर जीजा जी का मजाक मुझे अच्छा लगा …..

आज रात को सोनिया की शादी की होटल में पार्टी थी. हम सभी एक कार में होटल आ गए थे. वहां सोनिया को उसकी सहेलियों ने घेर रखा था. प्रिया सोनिया को सजाने सँवारने लगी. तभी प्रिया बोली –"तुम दोनों यहाँ क्या करोगे, नीचे हॉल में पार्टी एन्जॉय करो .."

मुझे तो मौका मिल गया. मैंने आज पार्टी के लिए खास सेक्सी ड्रेस पहनी थी. ये ड्रेस उसे बहुत पसंद थी. ब्रा इस तरह से कसी थी कि मेरे बूब्स बाहर उभरे हुए नज़र आ रहे थे. टाइट जींस और टॉप पहना था. ताकि दीपक मेरे हुस्न का मजा ले सके. उसे आज पटाना भी था. प्रिया से मुझे हरी झंडी मिल ही चुकी थी.

हम दोनो नीचे हाल में आ गए। थोड़ी देर वहां कुछ खाया पिया और बातें करते रहे। मैं बार बार उसका हाथ पकड़ लेती थी। वो हाथ छुड़ाता भी नहीं था। फ़्लोर पर कुछ जोड़े डांस कर रहे थे।

दीपक बोला- "चलो संगीता ! डांस करते हैं…"

"हां … चलो… ना…"

हम दोनो डांस फ़्लोर पर आ गए। मैंने उसकी कमर में हाथ डाला तो वो सिहर गया।

" जीजा जी…शरमा रहे हो… मेरी कमर में भी हाथ डालो…"

उसने मेरी कमर में हाथ डाल दिया और हम थिरकने लगे। मैं जान बूझ कर अपने बूब्स उसके सामने उछाल रही थी। उसकी नज़रें मेरे बूब्स से हट नहीं रही थी। मुझे लगा कि मेरा जादू चल गया। मैंने उससे टकराना शुरू कर दिया। कभी बूब्स टकरा देती तो कभी उससे चिपक जाती। अब दीपक भी समझने लग गया था। वो भी मुझसे कुछ ज्यादा ही चिपकने लग गया था, इतना कि उसके मोटे लण्ड की चुभन मैं कभी अपने चूतड़ों पर महसूस करती तो कभी अपनी चूत के पास। मैं तो यही चाहती थी कि दीपक मुझसे और खुल जाए। कुछ ही देर में हम थक गए। डांस छोड़ कर हम गार्डन की तरफ़ चले गए। दीपक गार्डन में आकर हरी घास पर लेट गया। उसका लण्ड उभर कर दिखने लगा।

मैं भी उसके पास ही बैठ गई। मैंने उसका सर अपनी जांघों पर रख लिया और प्यार से उसके बालों में अपनी उंग्लियों से सहलाने लगी। वो एकटक मुझे निहार रहा था। मैंने कहा-"क्या देख रहे हो जीजा जी…मुझे कभी देखा नहीं क्या?"

"हां.. पर ऐसी संगीता नहीं ....." वो मुस्कुरा उठा।

"..नहीं जीजा जी ....... तुम आज कुछ अलग लग रहे हो..."

" तुम कितनी सुन्दर लग रही हो आज.."

"हाय जीजा जी ...ऐसे मत बोलो ना.."

"सच कह रहा हूं .... तुम्हारा बदन भी आज सेक्सी लग रहा है... मुझसे अब सहा नहीं जा रहा है.."

"जीजा जी ....... हाय रे .... फ़िर से कहो.." मैं खुशी से बेहाल हुई जा रही थी।

वो मेरी आंखों में झांकने लगा। मैने भी अपने नयन उस से लड़ा दिये। आंखों ही आंखों में हम दोनो डूबने लगे। मैं भी अनजाने में उसके ऊपर झुकती चली गयी. हमारे होंट जाने कब एक दूसरे से चिपक गए. मेरी साँसे गहरी हो चली थी. दीपक मेरे होटों को चूस रहा था. मैं भी अपनी जीभ उसके मुंह में डाल चुकी थी. मेरा हाथ अपने आप ही उसके पेट पर से होता हुआ उसके लंड से टकरा गया. मैंने पेंट के बाहर से ही उसे पकड़ लिया. वो सिहर उठा. उसका लंड उत्तेजित हो कर मोटा और लंबा हो गया. बहुत ही कड़क होकर बाहर जोर लगा रहा था. उसका हाथ मेरी चुन्ची पर पहुँच गया था. एक हाथ से उसने मेरी चुन्ची दबा दी. मैं आनंद से निहाल हो गयी. ज्यादा खुशी इस बात की थी कि अब दीपक मुझे जरूर ही चोद कर रहेगा.

मैंने कहा -"हाय जीजा जी ....मेरी चुन्ची और मसल दो ...मजा आ रहा है ..." कहते हुए मैंने उसकी पेंट की जिप खोल दी और लंड को पकड़ कर सहलाने और हौले हौले उसे मसलने लगी.

उसके मुंह से सिसकारी निकल पड़ी. बोला -"थोड़ा जोर से पकड़ कर ऊपर नीचे करो ......."

"जीजा जी ...... कितना मोटा लंड है .... हाय जीजा जी मुझे कब चोदोगे ......"

"आज ही रात को ..... प्रिया से पूछ कर ..."

"वो हाँ कह देगी ? ......" मैंने अनजान बनते हुए पूछा. दीपक मुझे देख कर मुस्कराया पर बोला कुछ नहीं.

"अब बस करो नहीं तो मेरा रस निकल जाएगा ......."

"नहीं राजा ..... थोड़ा और मसलने दो ना ...तुम भी चुंचियां दबाव ना .... खींचो ना ....." मैं जोश में बोले जा रही थी.

पर दीपक उठ कर बैठ गया. मैं भी अपने कपड़े ठीक करने लगी.

हम दोनों को समय का पता ही नहीं चला. हॉल में आए तो महफिल रंग में थी. सोनिया और उसका हसबंड सामने वाली सिंहासन पर बैठे थे. प्रिया हमें देखते हुए मुस्कराई. मैं और दीपक भी मुस्करा दिए.

"रात बहुत हो गयी है ... अब चलना चाहिये......." प्रिया बोली. सोनिया ने भी जाने को कह दिया.

हम चारों यानि दीपक , मैं , प्रिया और बेबी बाहर आकर कार में बैठ गए. दीपक गाड़ी चला रहा था. प्रिया ने पूछा -"पार्टी एन्जॉय की या नहीं .."

"हाँ ...पार्टी अच्छी थी ...."

"क्या अच्छा था .. बताओ तो ..."

"जीजा जी...वो ही अच्छे लगे ..."

"तो बाजी हाथ में आयी या नहीं ...या मैं कुछ करूँ "

"तुम ही कुछ कर दो ना ....मेरी तो चुदवाने कि बहुत इच्छा हो रही है "

" हाँ मेरी भोली रानी .... आपके चेहरे से सब पता चल रहा है .... कि मेरी संगीता को किस चीज़ की जरूरत है .." और हंस पड़ी.

"पर तुम्हारी सहमति तो चाहिए ना ..."

"चलो आज घर चल के देखते हैं ...आज मन भर लेना ..." प्रिया ने भी अब साफ़ कह दिया.

दीपक का घर आ चुका था. मेरा घर अभी दूर था. और प्रिया ने रुकने को पहले ही कह दिया था.

हम सभी कमरे में गए. और बेबी को बेड पर सुला दिया. हमने अपने कपड़े बदले. मैंने भी प्रिया का एक ढीला सा पजामा पहन लिया. दीपक भी पजामा पहन कर आ गया. पजामे में से उसका उत्तेजित लंड की उठान साफ़ दिख रही थी.

प्रिया ने भी भांप लिया कि मैं क्या देख रही हूँ. वो मुझे देख कर मुस्करा दी. प्रिया अपनी बेबी के साथ लेट गयी फिर दीपक भी लेट गया. मैं किनारे पर दीपक के साथ लेट गयी. कमरे में धीमी बत्ती जल रही थी. मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था. मुझे पता था आज मेरी चुदाई हो ही जायेगी।

मैंने हिम्मत करके दीपक के पेट पर हाथ रख दिया. उसने मेरी तरफ़ देखा. मैंने हाथ बढा कर उसका लंड पकड़ लिया. वो अन्दर कुछ नहीं पहना था. उसके लंड की मोटाई से मैं सिहर उठी. मैं उसका लंड दबाने लगी. लंड और टन्ना ने लगा. मैंने पजामे के अन्दर हाथ डाल दिया और उसके लंड के ऊपर की चमड़ी को ऊपर चढा दी. उसके मुंह से सिसकारी निकल पड़ी. उसने मेरे बूब पकड़ लिए और धीरे धीरे सहलाने लगा .मेरे टॉप को ऊँचा करके मेरी चूचियां दबाने लगा. मेरे मुंह से आह निकल गयी।

मैंने उसका लंड पकड़े पकड़े ही उसकी तरफ़ पीठ कर ली. दीपक मेरी पीठ से चिपक गया. उसने मेरा पजामा नीचे उतार दिया. मेरी गांड की दरारों में उसका नंगा लंड टकरा गया. मेरे जिस्म में सनसनी फैलने लगी. फिर उसने लंड को और चूतडों में गडा दिया. मेरी चूतड की फांकों को चीरता हुआ उसका लंड मेरी गांड के छेद से टकरा गया. मेरी चूतडों के बीच उसका मोटा लंड फंसा हुआ बहुत आनंद दे रहा था. मुझे उसका पूरा साइज़ और नंगा स्पर्श अच्छा लग रहा था. उसके हाथ मेरी टॉप में घुस पड़े और चुन्ची मसलने लगे. उसके लंड ने जोर मारा तो मेरी गांड की छेद मे थोड़ा सा घुस गया. मैंने अपनी टांग थोड़ी ऊँची कर ली. फिर तो लंड की सुपारी फक से गांड में घुस गयी. मेरे मुंह से आह निकल गयी. उसने अपना लंड थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर दूसरे ही झटके में लंड अन्दर घुसता चला गया .. मैंने अपना मुंह भींच लिया कि कहीं आवाज ना निकल जाए. उसने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए. मेरी चूत में उसने उंगली घुसा दी. पर मुझे लगा कि उंगली मर्द की नहीं है. मैंने देखा तो वो प्रिया थी.

वो मुझे देख कर प्यार से मुस्कराई ."मजा आ रहा है ना ...."

" हाय .... प्रिया. ... मैं मर जाऊंगी .... मुझे मत देखो ना .."

"अरे शर्म मत कर ..चुदाने के लिए तो तू तड़प रही थी ना ...तेरे जीजा जी का लंड है ... खाए जा ...और मस्त हो चुदाए जा ..."

उसने मेरी गांड से अपना लंड निकाल लिया और अब वो बिस्तर के बीच में लेट गया. उसका लंड सीधा और लंबा तना हुआ खड़ा था.

प्रिया बोली - "इस चाकू पर बैठ जा ... और अपनी फांकों में इसे घुसने दे और आज तू चोद डाल अपने जीजा जी को ..."

"थंक यू. .." कह कर मैं उछल कर उसके लंड पर बैठ गयी ... मैंने निशाना लगाया और चूत का छेद खड़े लंड पर रख दिया. मेरी चूत पानी से भीग गयी थी ...सारा चिकना रस इधर उधर फ़ैल गया था. लंड ने मेरी चूत को चूमा और चूत ने उसका वैलकम किया. वो फच की आवाज करता हुआ अन्दर जाने लगा साथ ही मेरा बैलेंस भी बिगड़ गया और मैं लंड पर पूरा धच से बैठ गयी।

मेरे मुंह से चीख निकल पड़ी, "हाय ..जीजा जी ...मर गयी .."

प्रिया बोली - "हाँ .... मेरी रानी ...अब लंड का पता चला है ..."

"बहुत मोटा है ..राम. ..जड़ से टकरा गया है .."

दीपक अब नीचे से चूतडों को हिला हिला कर चोद रहा था. इतने में प्रिया ने मेरी गांड में उंगली घुसा दी. और घुमाने लगी. मैंने तो अब ऊपर से कमर हिला हिला कर दीपक को चोद रही थी .सारा कमरा फच ..फच ...की आवाज से गूंज उठा.

"हाय मेरी रानी ....दे धक्के ....प्रिया मेरी गांड में उंगली घुसा दे रे .." वो आनंद से सिसकारी भरने लगा.

"हाँ ..मेरे राजा ...ये लो ..." कहते हुए प्रिया ने अपनी दूसरे हाथ की उंगली दीपक की गांड में घुसा दी. मैं मस्ती में झूम रही थी.

" हाय ..जीजा जी ...चोद दे रे .... लगा दे ..रे .....और जोर से ....फाड़ दे यार ...... स ई से ऐ ....मर गयी .....हाय .....चोद दे ......जीजा जी .... मेरी चुन्ची मसल डाल ...खींच ...और खींच ....ऊऊओए ई ई .... रे ..... क्या कर हो ...राजा .... लगा ना ...जोर से ...."

मेरी हालत चरम सीमा पर पहुँच रही थी . मैं होश खोती जा रही थी.

अचानक उसने मुझे करवट बदल कर अपने नीचे दबा लिया. और मेरे ऊपर चढ़ गया. उसने लंड को दबा कर चूत में घुसा दिया. और उसके धक्के तेज होते गए. ऊधर प्रिया ने फिर से अपनी उंगली हमारी गांड में घुसेड़ दी और अन्दर गोल गोल घुमाने लगी. मुझे दोनों तरफ़ से डबल मजा आने लगा. पर अब मुझे लग रहा था ...कि मैं झड़ने वाली हूँ. उसके लंड की तेजी को और उंगली को सह नहीं पा रही थी.

"जीजा जी ...मैं मर गयी .... हाय रे ...चोद ...और चोद ...हाय निकल दे पानी ..... चोद दे रे. ...हाय यी ययय ......मैं मरी ....सी सी ओ ऊ ओए एई मैं मरी ...मैं गयी ऐ .....अरे निकाला ..निकल अ ....अरे ...अरे .... हाय रे ...."

कहते हुए मैंने अपना पानी निकाल दिया. प्रिया ने मेरी गांड से उंगली निकाल दी. अचानक दीपक के लंड का दबाव मेरी चूत पर बढ़ने लगा .. और फिर वो कराह उठा ..."हाय मेरी रानी ...मैं गया ....मेरा निकलने वाला है ...... हँ ...हँ ...... ओ ऊ ओह ह्ह्ह ह्ह्ह हह. ओ ऊ ह ह ह हह ह्ह्ह ...प्रिया ......निकला .....निकल अ .......आ आह हह आया आह्ह ..."

उसके लंड ने अपना रस उगलना चालू कर दिया. पर प्रिया तो इंतज़ार में थी उसने पीछे से हाथ डाल कर मेरी चूत से लंड खींच लिया और टांगो के बीच घुस कर लण्ड अपने मुंह में ले लिया. दीपक ये जानता था कि ये रस तो प्रिया का ही है. इसलिए उसने अपनी टांगे ऊँची कर के अपना पूरा लण्ड उसके मुंह में दे दिया. प्रिया पूरा रस गट गट करके पी गयी और अब लण्ड को चाट कर साफ़ कर रही थी. मैं निढाल सी बिस्तर पर पड़ी थी.

"मजा आया मेरी रानी " प्रिया बोली

"जीजा जी ने तो बस कमाल ही कर दिया ..इतनी जोर से चोद दिया कि पूछो मत .... पर माल मेरे लिए तो छोड़ा होता ....." प्रिया हंसने लगी.

"जीजा साली का रिश्ता ऐसा ही मजेदार होता है ...क्यूँ दीपक है ना ...."

" तुम तो लकी हो जो जीजा जी से रोज़ चुदवा लेती हो ..... मेरी तरफ़ तो देखो ना ..... चूत में ज़ंग लग जाता है .." मै हंसती हुयी बोली.

"अच्छा तो हरी झंडी ..बस "

"क्या .... हरी झंडी ..."

'ये तुम्हारा जीजा जी ...और ये तुम ...खूब चुदवाओ जीजा जी से ...... और मस्त हो जाओ "

दीपक और मैं एक दूसरे को मुस्करा कर देख रहे थे। आँखों आँखों में इशारे हो गए थे. हम सब उठे और अपने कपड़े ठीक किए. और सोने की तय्यारी करने लगे.

Tags: Hindi Font Stories, Desi Stories, Erotic Stories, Hindi Kahani, Hindi Stories, Indian Sex Stories, Stories In Hindi, Urdu Stories

0 comments:

Post a Comment

 
Design by Wordpress Theme | Bloggerized by Free Blogger Templates | coupon codes