Monday, 9 July 2012

Hindi Stories - मेरी वफ़ा या हवस

मेरी वफ़ा या हवस
हाय दोस्तों इस से पहले भी कई कहानी लिखी है, लेकिन ये मेरी सबसे बड़ी कहानी है, और आखरी कहानी है, क्योकि इस कहानी के बाद मै कोई कहानी नहीं लिखुगा! ये आप लोगो को कहानी पड़ने बाद खुद ही पता चल जाएगा! इस कहानी के माध्यम से आप लोगो को जरुर कुछ न कुछ एहसास दिलाएगा की इस दुनिया में औरत कैसी कैसी होती है? खैर पहले मै आप लोगो को अपने बारे में बताता हूँ! मेरा नाम नब्बू है, मेरी उम्र २८ साल है, और मैं आजाद जिन्दगी जीने वाला हूँ, नागपुर में रहता हूँ, मै एक अर्ध्सह्कारी कंपनी में काम करता हूँ, मेरी अपनी जिंदगी कई लड़की आई और गई मैंने किसी से भी प्यार नहीं किया और ना ही करना चाहता था! और मुझे इस बात का घमंड भी था! लेकिन ऐसा हो न सका एक बार मै अपने ऑफिस के काम से मै एक बार दिल्ली गया था, ये वो हकीकत है जिसने मेरी जिंदगी ही बदल दी और वहा मेरे साथ क्या क्या हुआ? ये ही मै आप लोगो को इस कहानी के माध्यम से बताना चाहता हूँ, जिसका एक-एक पल आज भी मेरे आँखों के सामने आता है!चलिये कहानी का मज़ा लेते है!
मै नागपुर से दिल्ली एयर पोर्ट पहुचा सुबह के ९:३० बज रहे थे मै एयर पोट से बहार निकल के टक्सी लिया और मुझे मीटिंग अटेंड करना था जिसके लिए मै पहले ही लेट हो गया था, मीटिंग ११:०० बजे की थी और मीटिंग का अजेंडा मेरे पास था, मै ऑफिस के गेस्ट हाउस पहुचा मीटिंग गेस्ट हाउस में थी मै समय पे पहुच गया था मीटिंग में करीब २० से २५ लोग होंगे मीटिंग १२:०० बजे शुरू हो गयी मैंने नोट किया की मीटिंग में एक औरत जिसकी उम्र ३० साल होगी, (नीली साडी में गोरी-चिट्टी पतली-दुबली और बड़ी-बड़ी आखो में काजल लगाए हुए मेरे सामने बैठी थी) वो पेन्सिल को अपने कान के ऊपर बालो में घुमाते हुए अपनी कातिलाना नजरो से मुझे ही देख रही थी, मै उसे अच्छी तरह से जनता था! उसका नाम शैलीन था, वो मेरे दोस्त की बीवी थी! कभी वो एक जानी मानी मोडल हुआ करती थी करीब ५ फूट ९ इंच उसकी हाईट होगी ! जिसकी शादी को अभी तीन साल भी नहीं हुए थे दो महीने पहले मेरे दोस्त की मौत हो गयी और उसके बाद उसे हमारी कंपनी ने अनुकम्पा नियुक्ति के आधार पर नौकरी दिया था! दोनों एक-दुसरे से बहुत प्यार करते थे उन्होंने लव मैरिज किया था! खैर मैंने उससे अनदेखा कर दिया! मैंने जब मीटिंग में खड़े हो स्पीच देने के बाद जब मै अपनी जगह बैठा तो सब लोगो की तरह वो भी जोर-जोर से ताली बजा रही थी मेरी नजर अचानक उसके ऊपर चली गयी वो मेरी ओर देख मुस्कुरा रही थी सो मैंने भी छोटी सी स्माइल दी ! जैसे तैसे शाम को चार बजे मीटिंग ख़त्म हुई, सब लोग लंच के लिए जाने लगे मुझे भी बड़ी जोर के भूख लगी थी मैंने प्लेन में सिर्फ नास्ता किया था और सुबह से कुछ नहीं खाया था !
मै टेबल पर से अपनी फाइल और पेपर समेटने लगा शैलीन भी अपने पेपर उठा चुकी थी और उसकी नजरे मेरी ओर ही थी ! मै जैसे ही बैग उठाया और चलने लगा की अचानक शैलीन ने आवाज दी!
शैलीन - "नब्बू यू डोंट नाव मी ?
मै - ओह शैलीन भाभी सॉरी आई एम् वैरी सॉरी, वो क्या है न मुझे बहुत जोर के भूख लगी है न! इसलिए मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा है!
शैलीन - अभी भी बहाने काफी अच्छे बना लेते हो !
मै - नहीं मै सच कह रहा हूँ !
शैलीन - चलो आज मेरे हाथो का खाना खाओगे तुम !
मै - नहीं भाभी !
शैलीन - मुझे कुछ नहीं सुनना है अभी वो (शैलीन का पति अर्जुन मेरा लंगोटिया यार) होते तो तुम इनकार करते क्या ?
मै - भाभी ऐसी बात नहीं है?
शैलीन - तुम भी येही समझते होना की मैंने उनकी जान ली है?(रोते हुए)
मै - भाभी रोओ मत, मैंने ऐसा कभी नहीं सोचा फिर तुम क्यों अपने आप को कोसती हो? (असलीअत क्या थी? ये सिर्फ मै जनता था की अर्जुन ने खुदख़ुशी क्यों की)
भाभी बहुत मानाने पर मै भाभी के साथ घर जाने के लिए राजी हो गया मै ये भी जनता था की भाभी बहुत जिद्दी है, वो मुझे अपने घर ले जा कर ही रहेगी, मै भाभी के साथ कार में बैठ गया और भाभी कार चला रही थी क्योकि उसे साथ ड्राव्हिंग बहुत पसंद थी, मै शांत बैठा था ! शैलीन ने बात शुरू की,
शैलीन - नब्बू ये बताओ की, तुम से तो अर्जुन कभी कोई बात नहीं छुपाता था ना?
मै - नहीं हम दोनों में कोई भी बात राज नहीं रहती थी !
शैलीन - आप दोनों को नॉन-वेज बहुत पसंद था ना ?
मै - हां
शैलीन - दिल्ली में अभी कब तक हो?
मै - कल दोपहर तक हूँ,!
शैलीन - यहाँ पे कहा रुके हो?
मै - होटल ओबेराय में!
करीब २० मिनट के बाद हम शैलीन के घर (जो क्नाग्ट पैलेस में है) पहुचे, शैलीन ने अपने घर में नौकरानी को कुछ पैसे दिए और मटन लाने के लिए कहा! फिर शैलीन टावेल ले कर मेरे पास आई और मुस्कुराते हुए कहा की ''नब्बू तुम फ्रेश हो जाओ" मै टावेल लिया और बाथरूम में चला गया १५ मिनट में मै फ्रेश हो कर ढीली-ढाली नाईट पैंट और टी शर्ट पहन ली और हॉल में बैठ गया तभी नौकरानी मटन ले आई और मटन किचन में ले गयी और शैलीन से कहा की "दीदी मै जा रही हूँ!" कह कर नौकरानी चली गयी! मै टीवी ओन किया किया और मूवी देखने लगा १०-१५ मिनट के बाद शैलीन हाथ में एक पाकेट ले कर मेरे पास आई और मुझे देते हुए कहा "ये अर्जुन ने आप के लिए लाया था!" मैंने पाकेट खोल के देखा तो उसमे ७५० एम्. एल. जिन (शराब) की बोतल थी!
मै - भाभी मैंने अर्जुन के जाने बाद पीना छोड़ दिया है ! (बोतल वापस देते हुए)
शैलीन - इसका मै क्या करुगी?.... अर्जुन ने तुम्हारे लिए ये थाईलैंड से लायी थी, और मै थोड़े ही ना इसे पियुगी! (कहके चली किचन की ओर चली गयी)
मैंने बोतल को सामने टेबल पर रख दिया और सोचा की काश अर्जुन होता हम दोने इस के मजे ले रहे होते! उसके जाने बाद लगभग मैंने पीना छोड़ ही दिया था! तभी शैलीन गिलास ले और एक प्लेट में नमकीन व ठन्डे पानी की बोतल ले कर आयी गयी और मेरे सामने टेबल पर रख दिया!
मै - नहीं भाभी मै नहीं पियूगा, मै सिर्फ अर्जुन के साथ ही पिता था!
शैलीन - मेरे सामने अर्जुन ने आप से वादा किया था ना की जिन्दगी कभी ना कभी वो तुम्हे जिन पिलायेगे !
मै - हां भाभी तब बात अलग थी लेकिन अब मै नहीं पिता!
शैलीन - मुझे नहीं पता मै अपने पति इच्छा पूरी कर रही हूँ !
मै - ठीक है भाभी लेकिन मै थोड़ा ही पियूगा!
शैलीन - ओ के बाकी तुम अपने साथ ही ले कर जाना! और हां तुम आराम से पियो तब तक मै खाना बना लेती हूँ!
"ठीक है ना ?"
मै - हां ठीक है!
शैलीन ने ए.सी. ऑन किया उसके बाद शैलीन किचन में खाना बनाने चली गयी मैंने जिन(शराब) की बोतल खोली और पैग बनाया और अर्जुन का नाम ले कर पीना शुरू कर दिया! बड़ा मजा आ रहा था क्योकि मै पहली बार जिन पी रहा था! मेरे दिमाग ख्याल आया की, "शैलीन क्यों ऐसा कर रही है, ऐसा कर के शैलीन को क्या मिलेगा?, कही शैलीन मुझसे चुदना तो नहीं चाहती है?, ना जाने शैलीन का मकसद क्या है?," "नहीं शैलीन को मेरे लंड से ही मतलब है, वो आज मेरे लंड से ही मतलब है क्योकि अर्जुन का खडा ही नहीं होता था!"(हां दोस्तों अर्जुन नामर्द तो नहीं था! लेकिन सेक्स में उसकी रूचि बिलकुल नहीं थी और वो बाप भी नहीं बन सकता था, क्योकि उसे दे में से एक भी वर्षण नहीं था!) "शायद ये बात शैलीन भी जान गयी थी इस कारण ही अर्जुन ने खुदखुशी की थी! ये बात मै ही जानता था! मुझसे अगर शैलीन चुदवाना चाहती है तो इसमें गलत क्या है?, इतने में ही बहार जोरो की बारिश होने लगी!
उसे जो अर्जुन से नहीं मिला वो मेरे से हासिल करना चाहती है, क्या मै शैलीन को चोदु या नहीं ?, जिंदगी में मेरे साथ कभी किसी को छोड़ने में ऐसी कशमकश नहीं आई थी! (मुझे हल्का-हल्का नशा सा हो रहा था) अब तो मेरा लंड भी खडा होने लगा था, "लेकिन मै शैलीन को छोड़ना नहीं चाहता था अगर शैलीन ने जबरदस्ती की तो?, मै क्या करूंगा?," इसका जवाब तो मेरे पास भी नहीं था! की तभी पीछे से शैलीन की आवाज आती है, "खाना तैयार हो गया है हाथ मूह धो कर आ जाओ!" मै जैसे पीछे मुडा और देखा तो दोस्तों मेरे पुरे शारीर में कपकपी सी होने लगी जैसे मैंने बिजली का तार पकड़ लिया हो, क्योकि शैलीन ने व्हाईट नाईट हॉट मक्सी (आधे सीने से ले कर जांघ के ऊपर तक का कपड़ा) पहनी थी जिसके आर-पार सब कुछ दिख रहा था, उसके खुले बाल गिले थे मतलब वो नहा के आई थी! ऐसा लग था की, संगमरमर को तराश कर इस मूरत (शैलीन) को बनाया गया हो ! मै तो उसके बदन को ही निहार रहा था! उस अदा में जो मै देख रहा था, मैंने कभी इतनी खुबसूरत और सेक्सी बला कभी नहीं देखि थी! उसका कसा हुआ जिस्म अचानक मेरा ध्यान भंग हुआ! "मुझे देखकर ही पेट भर लोंगे या खाना खाओगे?" शैलीन ने मुस्कुराते हुए कहा!
मै बाथरूम में गया और हैण्ड वाश लिक्विड अपने लंड पे लगाया और जिंदगी में पहली बार मुठ मारी! मैंने सोचा बारिश रुके या न रुके खाना खाने के बाद तुरंत निकल जाउगा! उसके बाद हाथ मूह धो कर डिनर टेबल पर पहुचा तो शैलीन मेरे सामने बैठ गयी! और खाना परोस रही थी, मैंने जैसे ही उसकी और देखा तो उसके दोनों सफ़ेद-सफ़ेद बूब्स साफ-साफ दिख रहे थे, सो मैंने अपनी नजरे निचे की और हम चुपचाप खाना खाने लगे! मैंने घडी की और देखा तो रात के ८:०० बज रहे थे! और बारिश शुरू ही थी, शैलीन ने बात शुरू की!
शैलीन - नब्बू ये बताओ की तुम ने अभी तक शादी क्यों नहीं की?
मै - अभी तक ऐसी लड़की ही नहीं मिली जिस से मै शादी करू!
शैलीन - और गर्लफ्रेंड?
मै - भाभी मैंने वो सब छोड़ दिया है! (मै उसका इशारा समझ रहा था)
शैलीन - तुम्हे कैसी लड़की चाहिए?
मै - आप के जैसी! (ये मेरे मूह से क्या निकल गया)
शैलीन - मुझमे ऐसा क्या है?
मै - भ...भा...भाभी! दूसरी बात करते है न? (मै फंस गया था)
शैलीन - तो ये बताओ की आज तक कितनी गर्लफ्रेंड फसाई है? (वो इसी टॉपिक पे बात करना चाहती थी)
मै - बस एक ही!
शैलीन - सोनी! (शायद अर्जुन ने इसे मेरे बारे में सब बता दिया होगा)
मै - हां !(मै चौक गया)
शैलीन - उसे भी छोड़ दिया! कभी उसकी याद नहीं आती?
मै - मुझे कोई अफ़सोस नहीं! (क्योकि मैंने कभी किसी से प्यार किया ही नहीं था)
शैलीन चुप हो गयी, मिने पानी पिने लगा, क्योकि शैलीन के सामने खाना वैसे भी मै खाना नहीं खाना हो रहा था क्योकि मेरा पूरा ध्यान शैलीन पर था सच में वो बहुत ही खुबसूरत थी! और मेरी हालत खराब हो रही थी और ऊपर से जिन (शराब) का नशा ना जाने आज क्या होगा! काश ये अर्जुन की बीवी न होती तो कब का इसका काम भारी कर दिया होता? तभी शैलीन ने कहा "और लो न नब्बू"
मै - नहीं... भाभी बस हो गया!
शैलीन - और नहीं लिया तो मै तुम्हे खुद अपने हाथो से खिलाउगी! "तुम सोच लो"
मै - नहीं भाभी मै और खाना नहीं खा सकता!
मेरे इतना ही कहने की देर थी की शैलीन अपने चेयर से उठी और मेरे प्लेट में खाना जबरदस्ती डाल दिया और वो मेरी गोद में बैठ गयी! मै चौक गया! मेरे जांघ और लंड पे उसके कोमल-कोमल गांड का एहसास हो रहा था और मेरा लंड लहे राड बन चुका था! इतने में ही शैलीन अपने हाथ से खाना मेरे मूह के पास लायी और कहा "अब मूह खोलोगे या नहीं?" मेरे मूह से तो आवाज ही नहीं निकल रही थी, मै उसके हाथो से खाना खाने लगा! शैलीन को तो मौक़ा मिल गया था अपनी बात जाहिर करने का,लेकिन मै क्या करू? मेरे सब्र का बाँध टूट गया था! मै नशे में अपनी औकात से बाहर हो रहा था! तभी शैलीन ने अपना असली खेल शुरू किया!
शैलीन - ये निचे क्या चुभ रहा है? (मेरी गोद से उतरते हुए)
"दिखाओ मुझे" (उसने मेरी नाईट पैंट और अंडरवेअर को एक साथ पकड़ के हटा दिया जिससे मेरा खडा लंड टन-टनाते हुए उसके सामने आ गया)
"अच्छा तो ये है, अर्जुन का तो इससे आधा था लेकिन चुभता नहीं था,"
मै - भाभी अर्जुन के लिए बस करो, वरना तुम्हारी जिंदगी खराब हो जाएगी!
शैलीन - तो अभी क्या है! (गमगीन होते हुए मुझसे लिपट गयी)
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था सही गलत समझ में नहीं आ रहा था अगर शैलीन को कोई ऐतराज नहीं है, तो मै क्यों संत बन रहा हूँ मै अभी इसकी जरुरत हूँ, ये मेरी! सो मैंने भी शर्म छोड़ दी और शैलीन को दोनों हाथो से गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया और प्यार से बेड पर लिटा दिया और मै उसके बाजू में करवट ले लेट गया की तभी शैलीन भी मेरी ओर पलट गयी उसने एक हाथ मेरे गाल पर रखा और कहा "नब्बू आज मुझे औरत होने सुख दो मै बहुत प्यासी हूँ!" इतना कहकर वो मेरे ऊपर आ गयी और किस करने लगी मैंने उसे बाहों में लिया और पलट गया अब वो मेरे निचे थी और मै उसके ऊपर, मैंने अपने होट उसके नाजुक गुलाबी-गुलाबी होटों पर रख दिया किस करने लग गया और एक हाथ से उसकी चिकनी-चिकनी जांघो को सहलाने लगा, शैलीन ने दोनों हाथो से मुझे कस के पकड़ लिया! हम दोनों पहले से ही गरम थे! इसलिए हमें जयादा समय नहीं लगने वाला था! मैंने पहले शैलीन की पैंटी उतारी फिर उसकी मक्सी मैंने भी अपने पुरे कपडे उतार दिया अब हम दोनों पूरी तरह से नंगे हो चुके थे!
शैलीन और मै हम दोनों ६९ की पोजीसन में बेड पर लेट गए मैंने अपना लंड उसके मूह में डाल दिया और अन्दर-भाहर करने लगा! मेरे लंड को उसके नाजुक-नाजुक होटो और जीभ का स्पर्श होने से मेरा नशा और मजा दुगुना हो रहा था! मै सातवे आसमान की सैर कर रहा था! मैंने भी अपनी जीभ उसकी चूत में डाल कर उसर रगड़ ने लगा था! मै पहली बार किसी की चूत चाट रहा था, उसकी चूत का खारा पानी आह..ह..ह क्या मजा आ रहा था! हम दोनों जरुरत से ज्यादा गरम और उतावले हो चुके थे फिर मै सीधे शैलीन के ऊपर लेट गया और उसके दोनों निप्पलो को पकडके चूसने लगा, अचानक मेरा ध्यान नाईट लैम्प के निचे गया जहा हनी (शहद) की बोतल रखी थी! मै ने बोतल उठाया, खोला और थोड़ा अपने लंड पे गिराया और बाकी शहद उसके दोनों बूब्स और उसकी चूत पे गिरा दिया!
शैलीन समझदार थी वो समझ गयी थी की उसे क्या करना है? सो मरे लंड को मूह में लेकर (शहद)चूसने लगी और मै भी उसके बदन पे लगे शहद को चाटने लग गया! शैलीन कहने लगी "आहह बहोत मजा आ रहा इसमें !" मै ने भी पहले निप्पल फिर चूत को चाट-चाटके पूरा साफ़ कर दिया अब मैंने शैलीन को लिटा दिया और उसके ऊपर आ गया और दोनों टाँगे फैला दी और मै उसकी दोनों टांगो के बिच में आ बैठ गया अपना लंड जैसे ही चूत में डाला, "मम्मी..ई मम्मी.ई..ई....ई.....ई" कहते हुए वो झट से सरक गयी और दोनों हाथो से अपनी चूत पकड़ कर टाँगे सिकुड़ ली और करवट ले कर रोने लगी! मैंने उसे अपनी तरफ खीचा और कहा "दर्द को भूल जाओ शैलीन फिर देखो कितना मजा आता है!"
मैंने शैलीन को सीधा किया और फिर वैसे ही उसकी दोनों टांगो के बिच में आ गया! इस बार मैंने शैलीन को अपनी बाहों में जकड लिया और अपना लंड उसकी चूत पे रखा और कहा "शैलीन शुरू करू ?" शैलीन - "लेकिन प्लीस धीरे करना, तुम तो जानते ही होंगे की मुझे अर्जुन ने कभी नहीं किया है!" जैसे ही शैलीन ने अपनी बात ख़तम की मैंने जोर के धक्का मारा और मेरा लंड आधा अन्दर जा चुका था, शैलीन छट- पटाने लगी मैंने और कस के शैलीन को पकड़ लिया और अंधा-धुन शाट पे शाट मरने लगा, शैलीन छट-पटा रही थी और चिल्ला रही थी! "मै मर जाउगी आराम से" मम्मी नब्बू छोड़ दो" मेरे बर्दास्त के बाहर हो रहा है!'' लेकिन मै कहा मानने वाला था मै तो शुरू ही था यु तो मैंने न जाने कितनी ही चुदाई की थी लेकिन इतना मजा पहले कभी नहीं आया था मै अपनी पूरी ताकत लगा के शाट लगा था साथ में पूरा बेड भी चिर-चिर की आवाज करते हुए हिल रहा था! शैलीन पूरा पसीने से भीग गयी थी लेकिन मै था की रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था! थोड़ी देर के शैलीन का दर्द भी कम होने लगा था, वो भी अपनी चुतड उठा-उठा के मेरा साथ देने लगी थी, अब मेरा मजा दुगुना हो गया था, सो मैंने शैलीन को अपनी बाहों से आजाद कर दि या और उसके दोनों निप्पल को एक साथ मूह में लेकर चूसने लगा!
मेरे सर पे तो शराब और शबाब का तो जैसे जूनून सवार था! हम दोनों ही अपनी जवानी भरपूर मजा ले रहे थे! मै उसे जी भर चोदना चाहता था क्योकि, शैलीन जैसी चीज मैंने पहले कभी नहीं चोदा था! मैंने सोचा की क्यों ना चोदने का कोई नया तरिका अपनाया जाये जो मैंने पहले कभी ना किया!
फिर मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और उसी बेडरूम में एक चार फिट की अलमारी थी, मैंने उसे दोनों हाथो से अलमारी पकड़ कर घोड़ी बनने को कहा, वो झुक कर घोड़ी बन गयी और मै उसके पीछे आ गया! उसकी गोरी-गोरी गांड देखकर तो मुझे और भी नशा आ रहा था! मैंने उसकी एक टांग उठा के अपने कंधे पे रख ली, इस तरह से उसकी छूट का पूरा खुल गया था अब मैंने उसकी कमर को पकड़ कर अपना लंड उसकी चूत में दन-दनाते हुए पूरा अन्दर तक डाल दिया और दनादन शाट लगा रहा था! शैलीन के मूह से बस "आह..ह धीरे करो आह..ह..ह" की आवाज आ रही थी! मै इतने जोर के शाट लगा रहा था की शैलीन के पुरे जिस्म के साथ-साथ वो अलमारी भी हिल रही जो शैलीन ने हाथो से पकड़ी थी! इतने शैलीन ने अपना पानी छोड़ दिया और चूत पूरी गीली हो गयी थी और मेरा लंड भी! जिसकी वजह से मेरा मजा किरकिरा हो रहा था! मैंने उसे फिर बाहों में उठाया और बेड पे उल्टा लिटा दिया और उसकी दोनों टांगो को खीच कर बेड के निचे कर दिया जिससे की उसकी गांड का '0' जैसा छेद साफ़ दिखाई दे रहा था! मैंने पीछे से उसके दोनों बगल में हाथ डाल के शैलीन को कास कर पकड़ लिया, मेरा लंड तो पहले से ही शैलीन के वीर्य से गिला था, मैंने अपना लंड शै लीन की गांड पे रखा और उसका मूह तिरछा कर के उसके दोनों नाजुक होटो को अपने दातो से पकड़ लिया और एक जोर के झटका लगाया मेरा आधा लंड उसकी गांड में चला गया! बस फिर क्या था? शैलीन तड़पने लगी थी लेकिन मैंने उसे ऐसा पकड़ा था की वो छूट ही नहीं सकती थी! मैंने शाट गति और तेज कर दी! और पूरी ताकत और रफ़्तार के साथ शाट पे शाट मारने लगा! मैंने आज तक ना तो ऐसी चूत चोदी थी और ना ही ऐसी गांड और ना ही इतना मजा आया था पहले कभी! मैंने तब तक शाट मरा जब तक मेरा पानी नहीं निकला, मैंने अपना सारा पानी शैलीन की गांड में ही छोड़ दिया! और उसकी बगल आ कर लेट गया!
हम दोनों की सासे जोर-जोर से चल रही थी और पसीने से पुरे भीग गए थे मैंने देखा की शैलीन को जरुरत से ज्यादा ही कमजोरी आ रही थी उसका पूरा शारीर प्रतिरोध करने से लाल हो गया था! रात के दो बज रहे थे! मैंने शैलीन को पानी दिया और आराम से सोने के लिए कहा! शैलीन ने अपने दोनों हाथो से मुझे पकड़ कर उसी बेड पर लेट गयी! हम दोनों नंगे ही थे! मुझे कब नींद आई पता ही नहीं चला? दुसरे दिन (दोपहर को तीन बजे जो मुझे पता ही नहीं था) मेरी नींद खुली, मेरा सर जोर से दर्द हो रहा था मानो की सर फट रहा हो! मै अभी भी नंगा ही था और मेरे कपडे वहा से गायब थे! इतने में शैलीन आई मैंने उसे देखते ही रजाई ओड ली! उसने काले रंग का गाउन पहना था!
शैलीन -अब क्यों इतना शर्मा रहे हो? (मुस्कुराते हुए)
मै -न.न..नहीं भाभी वो मैंने कपडे नहीं पहने है ना!
शैलीन - वो मैंने धो दिए अभी सूखने के है! 'कोई बात नहीं मै अर्जुन के कपडे ला देती हूँ! (कहते हुए वो चली गयी)
पांच मिनट के शैलीन वापस आई और उसके हाथ में अर्जुन के कपडे थे! "ये लो" मुझे देते हुए! मैंने जैसे हाथ आगे बढाया शैलीन अपने हाथ पीछे कर लिए!
मै - ये क्या भाभी ?
शैलीन - वादा करो की आज के बाद तुम मुझे सिर्फ शैलीन कहोगे!
मै - ठीक है! (वैसे भी शैलीन बहोत जिद्दी थी!)
शैलीन - जल्दी से फ्रेश हो जाओ!
मै - क्यों भाभी?
शैलीन - फिर भाभी ?
मै - सोरी शैलीन क्यों ?
शैलीन - सपराइज है तुम्हारे लिए!
मै नहा धो के शैलीन के दिए हुए कपडे पहन ही रहा था की मेरा ध्यान घडी की ओर गया, जिसमे साडे तीन बज रहे थे! मुझे एक बजे की ट्रेन से निकलना था जो शैलीन को भी पता था, तो फिर शैलीन ने मुझे जगाया क्यों नहीं? अब क्या चाहिए शैलीन को? खैर मै जैसे ही हॉल में पहुचा शैलीन काली साडी पहने हुए खडी थी, माथे पे काली बिंदिया, आँखों में काजल और अन्दर से उसका गोरा-गोरा जिस्म! शैलीन बहुत खुबसूरत लग रही थी जी तो कर रहा था की बस देखता रहू इसे हमेशा! लेकिन जैसे ही शैलीन ने मुझे देखा कहने लगी.....
''मै तुम्हारा कब से इन्तेजार कर रही हूँ क्या कर रहे थे बाथरूम में?
मै - शैलीन कही जा रही हो?
शैलीन - मै नहीं हम!
मै - हम मतलब?
शैलीन - मतलब ये की (मेरे पास आते हुए) आज दोपहर में तुम्हे जाना था ना लेकिन मै तुम घोड़े की नींद सो रहे थे, जब मै तुम्हे जगाने आयीं तो, तुमने मुझे अपनी बाहों में पकड़ लिया था बड़ी मुश्किल से मै अपने आप को तुमसे छुडाया! वैसे तुम बहुत गहरी नींद में सो रहे थे तुम्हे जगाना मुश्किल था!
मै - लेकिन मै जाना चाहता हूँ!
शैलीन - क्या मुझसे कोई गलती हो गयी? (उदास होते हुए)
मै - नहीं ऐसी कोई बात नहीं है लेकिन रुकने का कोई कारण भी तो नहीं है!
शैलीन - कोई बात नहीं आज हम कुतुबमीनार देखने चलते है! (मुझे बाहों में लेते हुए) और खाना भी बाहर ही खायेगे!
मै - ये क्या कर रही हो शैलीन?
शैलीन - क्यों कल रात जो हमारे बिच हुआ उसके आगे ये क्या है?
मै - ठीक है लिकिन खाना मै खिलाउगा!
शैलीन - ओ के
मैंने सोचा की आज यही रुक जाता हूँ कल चले जाउगा और शैलीन की बात भी पुरि हो जाएगी! फिर हम दोनों निकल पड़े और लाल किला और क़ुतुब मीनार देखा! शैलीन मेरे साथ ऐसा घूम रही थी जैसे की मै उसका पति हूँ बिच-बिच में मेरे हाथो में हाथ डाल कर चल रही थी मुझे भी उसके घुमने मजा आ रहा था! और फिर रात को नौ बजे हमने होटल ताज पैलेस खाना खाया फिर रात को करीब ११;०० बजे के आस-पास हम वापस आ गए! मै हॉल में बैठ कर टीवि ऑन कर के देखने लगा तब तक शैलीन ने मेरे लिए पानी ले कर आई! मै अपना बैग खोल कर बैठा (जिसमे जिन की बोतल थी) मैंने पानी ले कर टेबल पर रख दिया! इतने में ही शैलीन ने मेरे हाथो से बैग छीन लिया और बाजू में रख दिया और कहा "नब्बू आज तुम शराब नहीं पियोगे क्योकि इसे पिने के बाद तुम जानवर बन जाते हो!" मै समझ गया की शैलीन कल रात की बात कर रही है! मैंने कहा "मै शराब नहीं पी रहा था मै तो लैपटाप निकाल रहा था! इतने में ही शैलीन मेरे गोद में बैठ गयी और एक हाथ मेरी गर्दन डाला और दुसरे हाथो की ऊँगली से मेरे गाल और होटों को बड़े प्यार से सहलाने लगी और कहने लगी "मुझे पता तुम मौके की तलाश में रहते हो! अच्छा ये बताओ की तुमने आज तक कितनी लडकियों के साथ सेक्स किया है?" मै हैरान था की साले अर्जुन ने मेरे बारे में इतना सब कुछ बता दिया और ये भी की काला मेरा पसंदीदा कलर है! "बोलो ना" शैलीन की आवाज से मेरा ध्यान भंग हुआ मैंने कहा "नहीं ऐसा कुछ नहीं है मेरे सारे दोस्तों ने ऐसी ही अफवाह फैलाई थी" इतने में शैलीन अपनी ऊँगली से मेरे होतो को सहलाने लगी! वो मुझे गर्म कर रही थी क्योकि उसे मौक़ा मिल गया था मेरा लंड भी अपने पुरे आकर में आ चुका था मनो की लंड की चमड़ी फट रही हो, इतने में ही शैलीन ने अपना गालो से मेरे गालो को सहलाने लगी! मै आह-आह करते हुए मजा ले रहा था और शैलीन को दोनों हाथो से पकड़ लिया था की शैलीन ने अपने दातो से होटों से मेरे कान पकड़ लिए, मै एक हाथ से उसके बूब्स पकड़ लिया और जोर-जोर से दबा रहा था, शैलीन भी सिस्कारिया ले रही थी! मै सीधा एक हाथ से शैलीन के बाल पकड़ा और उसके होतो को किस करने लगा आह... क्या मजा आ रहा था? मै बता नहीं सकता उसके होटों का वो मीठा-मीठा स्टाब्री फ्लेवर मै जैसे हवा में उड़ रहा हूँ, अब मै और बर्दास्त नहीं कर पा रहा था!
मै सीधा खडा हुआ औए शैलीन को सोफे पर लिटा दिया और मैंने अपना अंडर-वेअर छोड़ के सारे कपडे फटा-फट उतार दिए और शैलीन के ऊपर आ गया पागल हो के किस्स कर रहा था थोड़ी देर के बाद शैलीन भी मुझे उठा दिया और अपनी साडी पेटीकोट और ब्लाउज उतार दिया! अब वो मेरे सामने काले रंग की पैंटी और ब्रा में खड़ी थी और कहने लगी "ये ही तुम्हारा फेवरेट कलर है ना?" मेरी तो जैसे आँखे फटी की फटी ही रह गयी थी! उसके गोरे-गोरे जिस्म पे वो काली पैंटी और ब्रा, मै तो उसे देखता ही रह गया! अचानक शैलीन ने कहा "बस हमेशा देखते ही रहना कभी लड़की नहीं देखि है क्या?" मैंने मुस्कुराते हुए कहा "शैलीन सच में तुम बहुत खुबसूरत हो मैंने आज तक तुम्हारे जैसी कभी किसी को नहीं देखा! जी तो चाहता है की तुम्हे हमेशा के लिए अपना बना लू" तो शैलीन ने मुझे दोनों हाथो से अपने बाहों में भर लिया कहने लगी "अभी तो मै तुम्हारी ही हूँ न!"
शैलीन ने अपना पूरा जिस्म मेरे हवाले कर दिया था जिसका मै जो चाहू कर सकता था! हम दोनों एक दुसरे के बाहों में थे और किस कर रहे थे, मै तो जरुरत से ज्यादा ही गर्म हो चुका था अब मै और बार्दास्त नहीं कर पा रहा था मैंने शैलीन की पैंटी और ब्रा फटा-फट उतार दी और अपनी अंडरवेअर भी! हम दोनों नंगे हो गए अब मैंने उसे सोफे पर ही सुला दिया और मै उसके ऊपर आ गया! मै अपने लंड से शैलीन की चूत को सहला रहा था और उसके दोनों बूब्स के निप्पलो को मूह में ले कर चूस रहा था! शैलीन भी मजा ले रही थी क्योकि उसकी हालत भी मेरे जैसी ही हो गयी थी! उसने आखिर कह ही दिया "नब्बू डालो ना अब और रहा नहीं जाता" बस फीर क्या था मैंने अपने लंड पे थूक लगाया और शैलीन की गांड के निचे सोफे की तकिया जिससे शैलीन की चूत उभर कर ऊपर आ गयी मैंने अपना लंड उसकी चूत पे रखा और धीरे-धीरे अन्दर डालने लगा क्योकि शैलीन को अभी भी कल चुदाई का दर्द था! मेरे लंड का ऊपर का हिस्सा (सुपाडा) ही अन्दर गया था की शैलीन ने मेरे मूह को दोनों हाथो से पकड़ के किस्स करने लगी, इतने में ही मैंने दन-दनाता हुआ शाट मारा! मेरा आधा लंड अन्दर चला गया! दर्द की वजह से शैलीन के मूह से सिस्कारिया न िकालने लगी! मैंने अपना कार्यक्रम जारी रखा और धीरे-धीरे शाट मार रहा था! थोड़ी देर के बाद शैलीन ने अपने टांग मोड़ लिया और निचे से अपनी गांड उछालने लगी! ये मेरा ग्रीन सिग्नल था, बस फिर क्या था मैंने अपने शाट की गति और तेज कर दी! शैलीन ने मुझे कस के पकड़ा था और आहह्.. आह... कर रही थी! मैंने भी अपना पूरा जोर लगा दिया! हमारी चुदाई से फच-फच की आवाज आ रही थी!
मैंने फिर शैलीन घोड़ी बना दिया और उसके पीछे आकर जैसे ही अपना लंड डाला शैलीन झट से पलट कर मेरे सामने खड़ी हो गयी और कहने लगी "इस तरह से मत करो मुझे बहुत दर्द होता है!" मैंने कहा "कोई बात नहीं" फिर मैंने उसे सोफे पर बैठा दिया और मै उसके सामने आया और शैलीन की दोनों टाँगे उठा कर अपने कंधो पे रखा और उसकी चूत में लंड डाला और शुरू हो गया फचा-फच का संगीत! शैलीन ने मेरा मूह पकड़ा और किस्स करने लगी! शैलीन ने अपनी पूरी जिबान मेरे मूह में डाल दी थी मै भी उसकी जिबान को चूस रहा था उसका भी एक अलग मजा आ रहा था! कभी मै शैलीन के मूह में जिबान डालता तो कभी शैलीन मेरे मूह में! जैसे ही शैलीन ने मुझे कस के पकड़ा मै समझ गया की वो झड़ने वाली है!
मैंने फिर अपना लंड शैलीन की चूत में निकाल कर सोफे पर बैठ गया और शैलीन को अपनी तरफ खीचा और उसकी दोनों टांगो को मोड़ कर अपनी जांघ बैठा लिया और उसके दोनों हाथ मेरे कंधो पर रख लिए! इस तरह से मेरा लंड शैलीन की चूत टकरा रहा था और मेरे होठ शैलीन के बूब्स से! फिर मैंने शैलीन की गांड को दोनों हाथो से पकड़कर हलके से उठाया और उसकी चूत पर निचे से अपना लंड जैसे ही लगाया शैलीन समझ गयी की उसे क्या करना है ? शैलीन मस्त हो कर ऊपर-निचे होने लगी थी जिससे शैलीन के बूब्स हिलने लगे थे! मैंने शैलीन की कमर को पकड़ लिया और मूह से शैलीन के निप्पलो चूसने लगा! शैलीन को और भी ज्यादा मजा आने लगा था! वो सी-सी करते हुए बोली "नब्बू ये सब कहा से सिखा? सच में तुमतो कमाल के मर्द हो!" मैंने कहा "शैलीन डार्लिंग अभी तो बहुत कुछ बाकी है!, 'जो तुम्हे अर्जुन ने भी नहीं बताया होगा!" फिर शैलीन ने मेरे दोनों गालो को पकड़कर मुझे किस्स करने लगी और इसी बिच शैलीन ने अपना पानी छोड़ दिया! फिर मै दोनों हाथो से शैलीन को पकड़कर वैसे ही खडा हो गया! मेरा लंड अभी भी शैलीन की चूत में ही था! शैलीन ने भी अपनी दोनों टांगो से मेरी कमर को पकड़ लिया और दोनों हाथो से मेरी गर् दन को इस तरह से शैलीन का सारा वजन मेरे पैर पर ही था! फिर मैंने अपने दोनों हाथ से शैलीन की गांड को निचे पकड़कर ऊपर-निचे करना शुरू कर दिया इस शाट में तो मुझे अलग ही मजा आता है दोस्तों! थोड़ी देर के बाद मेरा भी पानी निकलने ही वाला था की, 'मैंने अपना लंड निकाल लिया और शैलीन को सोफे पर बैठा दिया और कहा "मै अपना पानी कहा गिराऊ?" तो शैलीन ने कहा "जो तुमको पसंद है वो ही करो!, 'बाकी मै देख लुंगी!" शैलीन तो सोफे पर ही बैठी थी मैंने उसकी दोनों टांगो को थोड़ा सा खीचा और टांगो उठा के शैलीन को हाथो में पकड़ा दिया जिससे की शैलीन के चूत की लाली साफ़-साफ़ दिखाई दे रही थी! मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाला और अपनी पूरी ताकत के शाट पे शाट लगा रहा था! पांच सात मिनट के बाद मैंने शैलीन मैंने शैलीन की चूत में ही सारा पानी गिरा दिया!
करीब दो घंटे, की इस चुदाई में हम दोनों बहुत ज्यादा ही थक गए थे! शैलीन कहने लगी "नब्बू प्लीज मुझे बेडरूम तक पहुचा दो न?" मैंने कहा "क्यों नहीं" मैंने शैलीन को दोनों हाथो को मैंने दोनों हाथो से उठाया और उसे बेडरूम में जा बेड पे लिटा दिया और मै उसके बाजू में ही लेट गया! आधे घंटे के बाद हमने फिर सेक्स किया और उसके बाद हम सो गए!
इस तरह मै पांच दिन तक शैलीन के घर (दिल्ली में क्नाग्ट पैलेस) पर ही रहा! रोज रात में हम चुदाई करते थे और दिन में "द गेट, क़ुतुब मीनार, रेड फोर्ट, लाल किला और चांदनी चौक" खूब घुमा करते थे! इन पांच दिनों में मुझे ऐसा लग रहा था की जैसे मेरी नई-नई शादी हुई हो और मै अपनी बीवी (शैलीन) के साथ हनीमून पर आया हु! सच मानो तो मेरी वहा से जाने की मेरी इच्छा ही नहीं हो रही थी लेकिन वो मेरा घर भी तो नहीं था! मेरे नागपुर आने के बाद भी वो मेरे दिलो-दिमाग में उसकी (शैलीन) की यादे और बाते घूम रही थी!
दो दिन पहले ही शैलीन का फोन आया वो कहने लगी की "तुम बाप बनने वाले हो, 'मुबारक हो" ये सून कर मै खुश था और हैरान भी मैंने तभी ही शैलीन को शादी के लिये ऑफर किया लकिन शैलीन ने इनकार कर दिया और कहा "तुम मुझसे शादी करके सिर्फ मेरा जिस्म ही पा सकते, आत्मा और बाकी रिश्ता तो मेरा अर्जुन के साथ ही मरते दम तक जुड़ा है, और जुडा ही रहेगा!, 'रही बात तुम्हारे बच्चे की जो मेरी कोख में है' तो दुनिया वालो के लिए मै इसे अर्जुन का नाम दूंगी!"
मै - शैलीन तुम ये अच्छी तरह से जानती हो की मैंने आज तक किसी से प्यार नहीं किया है, लेकिन अब मै तुम्हे प्यार करता हूँ! I said you realy love you shaileen. ple's you don't break my hart.
शैलीन - I don't know anything and i tell you for onley your information bicause you are arjun's best friend and i alwayse see Arjun in yaour but you are not Arjun
ple's you don't know rong me and good luck. (रोते हुए कहने लगी मै कुछ नहीं जानती ये सिर्फ तुम्हारी जानकारी के लिए है क्योकि तुम अर्जुन के सबसे अच्छे दोस्त हो और तुम में मुझे अर्जुन दिखता है लेकिन तुम अर्जुन नहीं हो! मुझे गलत मत समझना! खुदा तुम्हे सलामत रखे)
शैलीन ने बाय कहकर फोन काट दिया! शैलीन की सिर्फ इस बात में मेरे जीवन में औरत नाम की परीभाषा ही बदल दिया! क्या ये (शैलीन) मेरा प्यार था या हवस?
आप लोग ही बेहतर बता सकते है!
nabbukhan_25@yahoo.com

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