Tuesday, 19 June 2012

Bahan Ke Sath Train Ka Safar

बहन के साथ ट्रेन सफ़र मेरा नाम अभिषेक है दोस्तों आज मैं फिर आप एक सच्ची कहानी को सुनाने जा रहा हु ये जीवन की एक सच्ची घटना है मैंने कभी सोचा भी नहीं था की ऐसा भी हो सकता है. मेरी फैमली में मम्मी पापा और मेरी बहन है जिसका नाम काजल उसकी उम्र २२ साल की है और मेरी 25 साल. हम लोग गर्मियों की छुट्टी में अपने गाँव गए हुए थे .छुट्टिया खत्म होने के बाद हमें वापस देहली आना था और मम्मी पापा किसी काम से गाँव में ही रुक गए. ट्रेन में उन दिनों बहुत ही रस था बड़ी मुश्किल ए.सी. में एक ही बर्थ मिली थी. काजल और मैं तेयार हो कर स्टेशन की तरफ चल दिए स्टेशन पहुचने के बाद हम ट्रेन का इन्जार करने लगे .थोड़ी ही देर में ट्रेन आ गयी और हम अपने डिब्बे में जाकर बैठ गए हमारी बर्थ सबसे ऊपर थी.थोड़ी ही देर में ट्रेन चल दी और कुछ समय के बाद एक लड़का कम्बल चादर और तकिया हमारी बर्थ पर रख कर चला गया इस समय शाम के 8 .30 बज चुके थे काजल ने खाना निकला और हम खाना खाने के बाद हम लोग अपनी बर्थ पर जाकर बैठ गए. तभी टी टी ने आकर टिकेट चेक किया उसके बाद हम अपनी बर्थ पर जाकर एक दूसरे की साइड में लेट गए.ट्रेन में मौषम काफी ठंडा था, इसलिए काजल कम्बल ओढ़ कर लेट गई थी. और अचनक मेरा पैर काजल के बूब्स में लग गया और मैं अपना पैर पीछे कर के लेट गया मैं सोचने लगा की काजल के चूची का स्पर्श कितना अच्छा था यह सोच कर मैं रोमांचित हो गया और मैंने दुबारा अपना पैर सीधा कर कर लिया फिर काजल के बूब्स मेरे पैर से टकराने लगे उसके बूब्स बहुत ही मुलायम लग रहे थे अब मैंने धीरे धीरे अपना पैर काजल के बूब्स से सटा दिया उसने किसी प्रकार का कोई विरोध नहीं किया फिर मैंने हिम्मत करके अपना एक हाथ उसकी जांघ पर रख दिया और ट्रेन हिलने के कारण मेरा हाथ काजल की जांघ पर फिसल रहा था फिर मैंने धीरे धीरे अपना हाथ आगे की तरफ बढ़ाना शुरू किया और अब मेरा हाथ काजल की चूत के ऊपर था मैंने धीरे धीरे उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया इधर मेरा लंड भी खड़ा हो कर बेताब होने लगा और अपनी बर्थ को परदे से ढक दिया मैंने एक नज़र काजल की तरफ देखा तो वो सो रही थी और मैं भी उसके बराबर में जाकर कम्बल ओढ़ कर लेट गया उसके बूब्स मेरे सीने से टकराने लगे मै अपने एक हाथ उसकी गांड पर रख कर सहलाने लगा और धीरे से मैंने उसका कुरता ऊपर की तरफ खिसका दिया और उसके बूब्स को भी कुरते से आजाद कर दिया उसने पिंक कलर की ब्रा पहन राखी थी जिस में वह बहुत ही सेक्सी लग रही थी उसके बूब्स भी गुलाबी कलर के थे जिन्हें देख कर मैं उनका दीवाना हो गया और धीरे धीरे उसके बूब्स को दबाने लगा तभी काजल की आँख खुल गई और मैंने अपना हाथ उसके बूब्स से हटा लिया काजल बोली भैया आप अभी तक सोये नहीं मैंने कहा मुझे नींद नहीं आ रही है अब भी उसका कुरता ऊपर था और उसके बूब्स मेरे सीने से सटे हुए थे. शायद उसने इस तरफ अपना ध्यान नहीं दिया और वह सीधी होकर लेट गई बर्थ छोटी होने के कारण मैंने अपना एक पैर उसके ऊपर रख लिया मैंने कहा, काजल तुम्हे कोई प्रोब्लम तो नहीं है काजल ने कहा, नहीं आप आराम से लेट जाओं और मै अपने पैर का घुटना उसकी चूत पर रख कर लेट गया और एक हाथ उसके पेट पर रख दिया तब उसने अपने कुरते की तरफ ध्यान दिया और कुरता नीचे कर के चुचाप लेट गई मेरा हाथ अभी भी उसके पेट पर था और उसकी शाशें मेरी शाशों से टकरा रही थी और मेरा खड़ा लंड उसकी जांघ से सटा हुआ था. काजल आँख बंद किये लेटी थी और कसमसा रही थी मैंने समय की नजाकत को देखते हुए अपना हाथ उसके बूब्स पर रख दिया और धीरे धीरे दबाने लगा काजल बोली भैया यह क्या कर रहे हो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया लेकिन मैंने उसके बूब्स को नहीं छोड़ा मैंने कहा , कुछ नहीं काजल आज मै तुम्हारी जवानी का रस पीना चाहता हूँ मेरे ऊपर आज तुम मेरे ऊपर यह एहसान कर दो फिर जो तुम कहोगी मैं वो करुगा इतना कहकर मैंने काजल के होठों पर एक किस किया फिर काजल ने मेरा हाथ छोड़ दिया
मैंने उसके कुरते से उसके बूब्स को बहार निकाल लिया और मै उन्हें दबाने लगा फिर मैंने उसकी ब्रा भी निकल दी और बूब्स को मुंह में लेकर उसके निप्पल को चूसने लगा और एक हाथ उसकी सलवार में डालकर चूत को मसलने लगा काजल की चूत से पानी निकल रहा था और मै उसकी सलवार का नाडा खोलकर उसके ऊपर लेट गया और अपनी पेंट को नीचे कर दिया फिर मैंने अपना लंड निकल कर उसकी चूत के छेद पर रख दिया और धीरे से एक धक्का मार दिया काजल तिलमिला गई और उसके मुंह से चीख निकल गई मेरा आधा लंड उसकी चूत के अन्दर चला गया था मैं कुछ देर ऐसे ही लेटा रहाऔर फिर धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये अब मेरा पूरा लंड काजल की चूत में चला गया था लेकिन काजल चूत बहुत ही टाईट थी मेरा लंड उसकी चूत में फंस के जारहा था अब काजल भी अपनी चूत को आराम से मरवा रही थी मैंने काजल की टांगो को थोडा और फैला दिया जिससे की लंड आसानी से उसकी चूत में जा सके अब काजल भी अपने चूतडो को उठा उठा मेरे लंड का मज़ा ले रही थी अब मैंने अपनी स्पीट थोड़ी तेज कर दी थी और काजल की चूत पर जमकर धक्के मरना शुरू कर दिया थोड़ी देर के बाद काजल ने मुझे कसकर पकड़ लिया और अपनी चूत को ऊपर उठाने लगी और कुछ देर के बाद वह झड़ गई और निढाल हो कर लेट गई मैंने धक्को की स्पीड बढा दी थी और कुछ देर के बाद मैं भी झड़ गया और कुछ देर काजल के ऊपर ऐसे ही लेटा रहा. काजल ने कहा भैया एक काम तुम्हे मेरा भी करना होगा ,मैंने कहा क्या काजल बोली भैया एक बार तुम मुझे अपने सारे कपडे निकाल कर चोदो मै अपने कपडे निकलती हु मैंने कहा ठीक है और मैंने अपने सारे निकाल दिए, भला मैं अपनी बहन को कैसे नाराज़ कर सकता था उसके बाद काजल ने भी अपना सलवार सूट निकल दिया उसका चिकना बदन देख दोबारा कर मेरा लंड फिर उसकी चूत मारने के लिया बेताब हो उठा और मैंने उसके पीछे हाथ डाल कर उसकी ब्रा का हुक को खोल दिया अब हम दोनों बिलकुल नंगे थे एक बार फिर मैंने काजल की जमकर चूत मारी.
दोस्तों अगर आपको मेरी कहानी अच्छी लगी तो एक बार मुझे मेल जरुर करे
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Abhishek Rana

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